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एक चक्कर श्यामसान का

जब कर न सको भरोसा किसी इंसान का, जब हल न निकले किसी परेशानी का । तब अपने चित्त को शांत करो ऐ विशाल, और लगा लो शिर्फ एक चक्कर श्यामसान का।। जब भी कभी भर जाए घमण्ड से सारा दिमाग, जब जलने लगे बदन में किसी से जलन की आग। जब कभी परख न कर पाओ सच और ईमान का, तो लगा लो शिर्फ एक चक्कर श्यामसान का।।

याद कैसे आना है-

  याद कैसे  आना है-  "मदत" कहने और देखने मे तो एक छोटा सा शब्द है लेकिन अगर इसको एक सही दिशा में सही व्यक्ति और सही कार्य मे किया जाए तो किसी की जिंदगी बनाने या बिगाड़ने की ताकत रखती है। और इस बात से कोई इनकार नही कर सकता जब आप का कोई कार्य किसी के जिंदगी में बदलाव ला दे चाहे वह बदलाव अच्छा हो या बुरा, तो वह इंसान बदलाव लाने वाले को नही भूल सकता। अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप उनके यादों में अच्छे बनकर रहना चाहते है या बुरे बनकर ? उचित तो यही है कि मदत एक सराहनीय कार्य हो और हम यादों में अच्छे बनकर रहे क्योकि वक़्त सबका बदलता है मेरे भाई , हो सकता है मैं/आप हमेशा बलवान रहें लेकिन आप की पीढियां भी बलवान होंगी इसके बार मे आप या मैं कोई दावा नही कर सकते, हो सकता है सामने से पलटवार तब ही हो जब आप की पीढ़ियां कमजोर हो ! तो क्यो उनका बुरा किया जाए